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Sunday, 24 July 2011

भ्रष्टाचार की लड़ाई

बसंत

देखो बसंत आया है भाई,
रंग ख़ुशी का लाया है भाई.

नाचो गाओ आज ख़ुशी से,
ख़ुशी मनाओ मिलकर भाई,
हम तुम चोरी चोरी से हँसते,
चोरी भी रंग लाया है भाई,
दही, मिठाई की दुकान है लगी,
आज खाओ तुम खूब मलाई.

देखो बसंत आया है भाई,
रंग ख़ुशी का लाया है भाई.

दुनिया की हरियाली छाई,
खुशियों की बरखा है लायी,
देखो देखो वो दौड़ी आई,
जुगलमिलन के सपने हैं भाई,
सपनो की दुकान को लगाओ,
आज ख़ुशी तुम खूब मनाओ.

देखो बसंत आया है भाई,
रंग ख़ुशी का लाया है भाई.

मैं और मेरी तन्हाई

Wednesday, 20 July 2011

---मौत के सौदागर---

 जिंदगी अब बेजान सी हो यी है
 दुनिया अब बेतार  लग रही  है
 कहा जाए इसे हम छोड़कर
 सब जगह सम्शान सी हो गायी है
महंगा नहीं रुक रही है...........
मगर जिंदगी थम सी जा रही है
मौत के सौदागरों के यहाँ तो
अब रोज़ पार्टिया ही हो रही है
शामें रंगीन हो रही है................
रातें जवा हो रही है.................
मौत के सौदागरों के यहाँ तो
व्यापारियों के व्यापार भी
अब फिदा हो रही है....
कहाँ जाए इसे हम छोड़कर
सब जगह सम्शान सी हो गायी है
जिंदगी अब बेजान सी हो गयी है

*****जुगलमिलन*****

ये जिंदगी

काश ये जिंदगी ऐसी होती
पास में गम नहीं और .....
खुशी ही भरपूर होती ......
मरती नहीं, मिटती भी नहीं
और तन्हाई पास में भी
कभी ना भटकती .........
मुस्कुराहट होती और
दिलों में चाहत होती..
काश ये जिंदगी ऐसी होती
कि मिलकर दूसरों  से .....
बहुत ही खुशी होती.....
काश ये जिंदगी ऐसी होती

***जुगलमिलन***

Friday, 8 July 2011

निकम्मी सरकार

Thursday, 30 June 2011

या मालिक

          या मालिक