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Sunday, 24 July 2011

बसंत

देखो बसंत आया है भाई,
रंग ख़ुशी का लाया है भाई.

नाचो गाओ आज ख़ुशी से,
ख़ुशी मनाओ मिलकर भाई,
हम तुम चोरी चोरी से हँसते,
चोरी भी रंग लाया है भाई,
दही, मिठाई की दुकान है लगी,
आज खाओ तुम खूब मलाई.

देखो बसंत आया है भाई,
रंग ख़ुशी का लाया है भाई.

दुनिया की हरियाली छाई,
खुशियों की बरखा है लायी,
देखो देखो वो दौड़ी आई,
जुगलमिलन के सपने हैं भाई,
सपनो की दुकान को लगाओ,
आज ख़ुशी तुम खूब मनाओ.

देखो बसंत आया है भाई,
रंग ख़ुशी का लाया है भाई.

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