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Wednesday, 20 July 2011

---मौत के सौदागर---

 जिंदगी अब बेजान सी हो यी है
 दुनिया अब बेतार  लग रही  है
 कहा जाए इसे हम छोड़कर
 सब जगह सम्शान सी हो गायी है
महंगा नहीं रुक रही है...........
मगर जिंदगी थम सी जा रही है
मौत के सौदागरों के यहाँ तो
अब रोज़ पार्टिया ही हो रही है
शामें रंगीन हो रही है................
रातें जवा हो रही है.................
मौत के सौदागरों के यहाँ तो
व्यापारियों के व्यापार भी
अब फिदा हो रही है....
कहाँ जाए इसे हम छोड़कर
सब जगह सम्शान सी हो गायी है
जिंदगी अब बेजान सी हो गयी है

*****जुगलमिलन*****

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